मोदी कैबिनेट की पहली बैठक सेवा तीर्थ में, मंत्रियों को क्यों देनी पड़ती है अच्छी खबर?

सेवा तीर्थ में मोदी कैबिनेट की पहली बैठक: एजेंडा से आगे ‘गुड न्यूज’ की खास परंपरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय सेवा तीर्थ में मंगलवार सुबह 11 बजे केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई गई है। यह बैठक कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर में मंत्रिपरिषद एक साथ बैठेगी। 13 फरवरी को ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक हुई थी और उसी दिन पीएमओ का औपचारिक रूप से सेवा तीर्थ में स्थानांतरण कर दिया गया।

साउथ ब्लॉक की यादें और ऐतिहासिक संदर्भ

सूत्रों के अनुसार, साउथ ब्लॉक में हुई अंतिम बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस भवन से जुड़ी कई ऐतिहासिक बातों को साझा किया। उन्होंने मंत्रियों को बताया कि स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की शुरुआती चार कैबिनेट बैठकें राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुई थीं।

प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक से अनेक ऐतिहासिक और रणनीतिक फैसले लिए गए। देश के चार बड़े युद्धों के दौरान यहीं स्थित वॉर रूम में अहम रणनीतियां बनाई गईं। इन संदर्भों के जरिए उन्होंने मंत्रियों को प्रशासनिक परंपराओं और निर्णय प्रक्रिया की गंभीरता का अहसास कराया।

बैठक में सिर्फ एजेंडा नहीं, ‘गुड न्यूज’ भी जरूरी

कैबिनेट की साप्ताहिक बैठकों की एक खास बात यह है कि इनमें केवल तय एजेंडे पर चर्चा नहीं होती। प्रधानमंत्री सप्ताह भर के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने मंत्रियों से खुलकर विचार-विमर्श करते हैं। वे उनसे फीडबैक लेते हैं, सुझाव मांगते हैं और विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हैं।

इसी के साथ एक अनोखी परंपरा भी जुड़ी है—हर मंत्री को बैठक के दौरान एक ‘गुड न्यूज’ साझा करनी होती है। यह पहल न केवल सकारात्मक माहौल बनाती है, बल्कि मंत्रियों को बेहतर काम करने और नवाचार लाने के लिए भी प्रेरित करती है।

मंत्रालय की उपलब्धि या व्यक्तिगत खुशी

सूत्र बताते हैं कि ‘गुड न्यूज’ दो तरह की हो सकती है—

  1. मंत्रालय की उपलब्धि से जुड़ी खबर

  2. व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी प्रेरक जानकारी

कई बार मंत्री अपने मंत्रालय की किसी बड़ी उपलब्धि को गुड न्यूज के रूप में साझा करते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया था कि उनके मंत्रालय के तहत एक घाटे में चल रहा सरकारी उपक्रम कुछ ही महीनों में सौ करोड़ रुपये के लाभ में पहुंच गया। इस तरह की जानकारी अन्य मंत्रियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती है।

बिजली, पानी, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और आईटी जैसे क्षेत्रों में जब कोई फैसला आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है, तो उसे भी बैठक में गुड न्यूज के रूप में रखा जाता है।

जब निजी खुशी बनी ‘गुड न्यूज’

कभी-कभी व्यक्तिगत जीवन की खुशियां भी बैठक का हिस्सा बनती हैं। पिछले वर्ष नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कैबिनेट बैठक में बताया था कि वे पिता बने हैं और उनके घर बेटे का जन्म हुआ है। इस सूचना पर प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों ने उन्हें बधाई दी।

इस तरह की साझा खुशियां टीम भावना को मजबूत करती हैं और आपसी संबंधों को भी सहज बनाती हैं।

सकारात्मक माहौल और निर्णय क्षमता

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की यह पहल मंत्रियों को आम जनता से जुड़े निर्णय लेने और मंत्रालयों में नए मानदंड स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है। आम तौर पर एजेंडे पर औपचारिक चर्चा पूरी होने के बाद अनौपचारिक दौर में गुड न्यूज साझा की जाती है। इससे बैठक का समापन सकारात्मक माहौल में होता है।

सेवा तीर्थ में शिफ्ट होने के फायदे

अब कैबिनेट सचिवालय भी सेवा तीर्थ में स्थानांतरित हो गया है, जो पहले राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित था। इससे प्रशासनिक कामकाज में अधिक सुविधा और समन्वय की उम्मीद की जा रही है।

सेवा तीर्थ के पास ही प्रधानमंत्री आवास का निर्माण भी जारी है। इसके पूरा होने के बाद नया संसद भवन, नया प्रधानमंत्री कार्यालय, आवास और प्रमुख मंत्रालय एक से दो किलोमीटर के दायरे में आ जाएंगे। इससे वीवीआईपी मूवमेंट के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या में भी कमी आने की संभावना है।

निष्कर्ष

सेवा तीर्थ में होने वाली यह पहली कैबिनेट बैठक केवल स्थान परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि प्रशासनिक परंपराओं और सकारात्मक कार्य संस्कृति का भी संकेत देती है। एजेंडे से आगे बढ़कर ‘गुड न्यूज’ साझा करने की पहल सरकार के भीतर उत्साह, पारदर्शिता और परिणाम-केंद्रित सोच को बढ़ावा देती है।

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