Bihar News Update: बिहार के विधायकों को बड़ा तोहफ़ा: हर महीने फोन खर्च के लिए मिलेगा इतने रुपये
बिहार विधानमंडल ने अपने सदस्यों—विधायक (MLA) और विधान परिषद सदस्य (MLC)—के लिए टेलीफोन भत्ता व्यवस्था में बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब सभी सदस्यों को हर महीने ₹8,300 का फिक्स्ड फोन भत्ता मिलेगा। इस कदम के पीछे सरकार का उद्देश्य संचार व्यवस्था को सरल बनाना और विधायकों को फोन बिल जमा कराने की प्रक्रिया से मुक्त करना है। नई व्यवस्था 04 दिसंबर 2025 से लागू कर दी गई है।
टेलीफोन भत्ते में सुधार: बिल-वाउचर की झंझट खत्म
पहले विधायकों को फोन भत्ता पाने के लिए अपने फोन बिल या वाउचर जमा कराने पड़ते थे। इस प्रक्रिया में समय भी लगता था और कई बार तकनीकी खामियों के कारण भुगतान देर से होता था। अब इस पूरी प्रक्रिया को खत्म करते हुए सरकार ने फिक्स्ड राशि देने का निर्णय लिया है।
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में “बिहार विधानमंडल सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) नियम, 2025” की प्रति पेश करते हुए इस बदलाव की औपचारिक घोषणा की। नई व्यवस्था के अनुसार हर विधायक अब बिना किसी दस्तावेज़ी प्रक्रिया के अपने फोन खर्च के लिए तय राशि का मासिक लाभ ले सकेगा।
कितने भी फोन कनेक्शन, खर्च एक ही भत्ते में शामिल
नए नियमों में एक और बड़ा और दिलचस्प प्रावधान है। इसके तहत MLA-MLC एक फोन नहीं, बल्कि कई फोन कनेक्शन भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चाहे सदस्य के पास 1 फोन कनेक्शन हो या 10—सभी का खर्च सरकार द्वारा तय ₹8,300 की राशि में शामिल माना जाएगा।
यह बदलाव सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है जिसके द्वारा वह विधानमंडल सदस्यों को आधुनिक संचार सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि डिजिटल युग में काम की प्रकृति बदल चुकी है और जनप्रतिनिधियों को कई माध्यमों से जनता व अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहना पड़ता है। ऐसे में फोन बिल की पाबंदियाँ उनके काम को बाधित कर सकती थीं।
सरकार का उद्देश्य: संचार व्यवस्था को सुगम बनाना
इस निर्णय के पीछे सरकार का उद्देश्य विधायकों को तकनीकी प्रक्रियाओं से मुक्त कर उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से जनता के कार्यों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना है। कई MLAs ने पूर्व में बताया था कि वाउचर जमा कराने, बिल सत्यापन और भुगतान में विलंब जैसी समस्याएँ उनके लिए परेशानी का कारण थीं। नई प्रणाली बहु-स्तरीय फाइलिंग प्रक्रिया खत्म करेगी और सभी सदस्यों को हर महीने समय पर भत्ता मिल सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल विधायकों के काम को सरल करेगा, बल्कि संचार प्रणाली को मजबूत बनाकर उन्हें जनता के साथ लगातार जुड़े रहने में मदद करेगा।
राज्यपाल ने 11 महत्वपूर्ण विधेयकों को दी मंजूरी
टेलीफोन भत्ता व्यवस्था से संबंधित इस फैसले के साथ ही, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विधानमंडल द्वारा पारित 11 महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी देकर उन्हें कानून का दर्जा दे दिया है। इन विधेयकों में कई ऐसे प्रस्ताव शामिल हैं जो आने वाले वर्षों में बिहार के प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करेंगे।
इनमें सबसे प्रमुख हैं
बिहार विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2025
यह विधेयक राज्य के वित्तीय खर्च और योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी प्रावधानों से संबंधित है। इसे राज्य की आर्थिक कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
बिहार GST (संशोधन) विधेयक 2025
इस विधेयक के लागू होने से राज्य की व्यापार और कराधान प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा भूमि उपयोग, धार्मिक न्यास प्रबंधन, कृषि भूमि रूपांतरण और भूमिगत पाइपलाइन से जुड़े विधेयक भी मंजूर हुए हैं। ये सभी कानून भूमि प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
विधानसभा में उपाध्यक्ष का निर्विरोध चुनाव
04 दिसंबर का दिन विधानसभा के लिए कई फैसलों के कारण महत्वपूर्ण रहा। फोन भत्ता सुधार और विधेयक पारित होने के अलावा इसी दिन विधानसभा में उपाध्यक्ष के पद का चुनाव भी संपन्न हुआ।
जदयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र नारायण यादव को दोबारा निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका नाम प्रस्तावित किया। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इसका समर्थन किया। चूंकि उनके अतिरिक्त कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था, इसलिए चुनाव बिना मतदान के ही पूरा हो गया।
नया फोन भत्ता: आधुनिक विधायन की दिशा में कदम
इस पूरी व्यवस्था को बिहार सरकार द्वारा विधायी कामकाज के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फोन भत्ता को सरल बनाना उस व्यापक सुधार का हिस्सा है जिसके तहत विधायकों की कार्यशैली को अधिक डिजिटल, तेज और प्रभावी बनाना है।
नई व्यवस्था न केवल समय बचाएगी, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं को भी सरल बनाएगी। इससे सदस्यों को जनता के मुद्दों पर ज्यादा समय और ध्यान देने का अवसर मिलेगा।